Wednesday, May 6, 2015

बावरा!


ये शब्द सुनते ही, मन-मस्तिष्क में कोई अर्थ या शब्दार्थ या भावार्थ नहीं
बल्कि एक जीवन जीने के एक अलमस्त तरीके की छवि दौड़ जाती है,
और
क्या मजेदार बात है कि इस छवि को,
हम कोई और शब्द नहीं दे पाते...
लेकिन ये शब्द-मात्र आनंद देता है...

आनंद....

वो आनंद जिसे शब्द देना संभव नहीं है...
आनंद को आनंद के अलावा
कोई दूसरा शब्द समझा भी नहीं सकता.
और
मैं आप सबसे भी नहीं चाहता
कि
इस पचड़े में पडें..
आनंद लें....
बावरे शब्दों का..
बावरी धुनों का..


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