Friday, July 27, 2012

क्या लिखें....!

जीवन की धारा लिखो,
सूरज का पारा लिखो,
सूखे पत्ते का झूम कर गिरना लिखो,
नदी का वो गिरना, बन कर झरना लिखो
चींटी लिखो, जंगल लिखो
जीवन का मंगल लिखो,
अंतर्मन की अनदेखी गहराई लिखो,
सामने जो भी होता दिखाई लिखो


एक बरगद हो रहा धराशाई लिखो
एक कोंपल की पहली अंगड़ाई लिखो,



शंकर का विषपान लिखो,
कान्हा के रसखान लिखो,
लिखो ऐसा कि अंधेरे के मन में डर समा जाए.
लिखो ऐसा कि इंसां नयी रोशनी में नहा जाए.

Saturday, March 31, 2012

सिद्धांत और व्यवहार की खाई

अर्थशास्त्र, समाज शास्त्र, राजनीति शास्त्र को भी विज्ञान कहा गया है.... सामाजिक विज्ञान....
विज्ञान
(Science)....सिद्धांतों (Theories) पर आधारित होता है...और सिद्धांत (Theory)..  मान्यताओं (assumptions) पर... मान्यताओं के कुछ प्रमुख तत्व होते हैं... और कुछ गौण तत्व..

आमतौर पर.. सिद्धांतों को अपनाने में हम लोग... प्रमुख तत्वों के आधार पर ही... उसे व्यवहार में लाने का प्रयोग करते हैं...
प्रयोगशालाओं में भौतिक शास्त्र और रसायन शास्त्र जैसे विज्ञानों के अध्ययन में.... हम उन मान्यताओं और उसके सभी कारकों (प्रमुख और गौण) को .... मान्यताओं के अनुरूप.... बना सकते हैं...
Create कर सकते हैं...

लेकिन सामाजिक विज्ञानों में अक्सर ऐसा नहीं हो पाता..... जैसे मांग और पूर्ति के सिद्धांत की मान्यताएं हैं...
- मनुष्य एक विवेकशील प्राणी है..
- वस्तु का उत्पादन स्थिर है...
- आलोच्य वस्तु का दूसरा कोई विकल्प नहीं है..

ऐसी स्थिति में जब किसी वस्तु की मांग बढ़ेगी, तो बाकी चीजें समान रहने पर.... वस्तु की कीमतें बढ़ जाएंगी...
लेकिन तब क्या होगा... अगर
- मनुष्य विवेकशील प्राणी की तरह व्यवहार ना करे
- या वस्तु का उत्पादन स्थिर ना रहे... वो और बढ़ जाए..
- या वस्तु का कोई दूसरा विकल्प आ जाए..

ऐसी स्थिति में... मांग बढ़ने पर वस्तु की कीमतें बढ़ने का सिद्धांत ... व्यवहार में खरा उतरता नहीं दिखाई देगा...

चलिए अब एक सिद्धांत और बनाते हैं...

ईमानदारी सबसे अच्छी नीति है..

और इसकी मान्यताएं हैं..
इस सिद्धांत पर चलने वाले
- व्यक्ति को जिंदगी की सफलता के बजाय सार्थकता का ध्यान रखना होगा..
- व्यक्ति को सीमित रूप से उपलब्ध संसाधनों से ही गुजारा करना होगा
- सीमित संसाधनों के बावजूद उसे अपनी अधिकतम उत्पादकता देनी होगी,
- व्यक्ति को अपने बच्चों की इच्छाओं को भी इस तरह से हैंडल करना होगा कि उनमें कोई ग्रंथि या हीन-भावना ना आये

अब इस सिद्धांत को जीवन के व्यवहार में प्रयुक्त करने पर अगर कोई एक भी मान्यता.... अधूरी रह जाती है.. या पूरी नहीं हो पाती है.... सिद्धांत और व्यवहार के बीच खाई दिखाई देगी..

और फिर आप ऐसे सिद्धांतों को लॉकर में डाल देंगे....

Friday, January 27, 2012

बरगद...



बड़ा निर्मोही और निष्ठुर होता है.. बरगद

तमाम छोटी - बड़ी जिंदगियों को कभी 
आसरा देने से पीछे नहीं हटता 
लेकिन उन जिंदगियों को 
उनके नये सफर की उड़ान भरने से 
कभी नहीं रोकता
बड़ा निर्मोही और निष्ठुर होता है.. बरगद

तमाम पथिकों को 
अपनी विशाल छांह में विश्राम देता है
उनकी जिंदगी की कशमकश से निकले
स्वेद बिंदुओं को,
अपने प्यार के आंचल से पोंछता है, 
फिर भूल जाता है उन पथिकों को
बड़ा निर्मोही और निष्ठुर होता है.. बरगद

तूफां को भी अपनी जटाओं में
उलझा ले, 
लेकिन अपनी छांव में किसी को 
पनपने नहीं देता,
अपनों को आंसुओं के साथ विदा 
करने को लाचार औ बेबस होता है.. बरगद,
बड़ा निर्मोही और निष्ठुर होता है.. बरगद