Friday, July 27, 2012

क्या लिखें....!

जीवन की धारा लिखो,
सूरज का पारा लिखो,
सूखे पत्ते का झूम कर गिरना लिखो,
नदी का वो गिरना, बन कर झरना लिखो
चींटी लिखो, जंगल लिखो
जीवन का मंगल लिखो,
अंतर्मन की अनदेखी गहराई लिखो,
सामने जो भी होता दिखाई लिखो


एक बरगद हो रहा धराशाई लिखो
एक कोंपल की पहली अंगड़ाई लिखो,



शंकर का विषपान लिखो,
कान्हा के रसखान लिखो,
लिखो ऐसा कि अंधेरे के मन में डर समा जाए.
लिखो ऐसा कि इंसां नयी रोशनी में नहा जाए.

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