- संस्कृति और परंपरा की बात करो तो सवर्णवादी या रूढ़िवादी
ना करो तो.... रीढ़विहीन राष्ट्रविरोधी या पाश्चात्य से प्रभावित
ना करो तो.... रीढ़विहीन राष्ट्रविरोधी या पाश्चात्य से प्रभावित
- धर्म की बात करो तो संकीर्ण व सांप्रदायिक
ना करो तो.... अधर्मी, अज्ञानी, अनपढ़ या अपनी जड़ों से कटा हुआ
ना करो तो.... अधर्मी, अज्ञानी, अनपढ़ या अपनी जड़ों से कटा हुआ
- जीवन मूल्यों की बात करो तो पुरानतपंथी और नये जमाने के साथ सामंजस्य बिठाने मे असमर्थ
ना करो तो.... अनैतिक, अराजक और असामाजिक तत्व की संज्ञा
ना करो तो.... अनैतिक, अराजक और असामाजिक तत्व की संज्ञा
- शिक्षा और चरित्र निर्माण की बात करो तो अप्रासंगिक कहलाओ
ना करो तो... पितृत्व कार्य में भी नाकारा
ना करो तो... पितृत्व कार्य में भी नाकारा
- व्यवस्था में सुधार की बात करो तो अव्यावहारिक या अपना काम ना निकाल पाने में असमर्थ
ना करो तो... ये ठप्पा कि आप जैसे लोगों की वजह से पूरे समाज का ये हाल है...
ना करो तो... ये ठप्पा कि आप जैसे लोगों की वजह से पूरे समाज का ये हाल है...
जीवन यापन का मौजूदा दौर बड़ा घातक है...
भौतिक सुख सुविधाओं की प्रचुरता और वैविध्यता लेकिन मानसिक और बौद्धिक विकास की दिशा में विकल्पहीनता...
चेतन तत्व का लगातार क्षरण करती जा रही...संवेदनहीनता और असहिष्णुता..... असहमत होने का भी अधिकार छीनती जा रही है और असहमति को वैमनस्यता घोषित करती जा रही है.....
भौतिक सुख सुविधाओं की प्रचुरता और वैविध्यता लेकिन मानसिक और बौद्धिक विकास की दिशा में विकल्पहीनता...
चेतन तत्व का लगातार क्षरण करती जा रही...संवेदनहीनता और असहिष्णुता..... असहमत होने का भी अधिकार छीनती जा रही है और असहमति को वैमनस्यता घोषित करती जा रही है.....
लेकिन असहमति वैमनस्यता है..
इससे असहमत हूं
मैं........
मैं........
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